उसके बाद से जब कभी समंदर में तूफान आता, लहरें ऊंची उठतीं, सागर अपने मुकुट की शक्ति से उन्हें शांत कर देता। उसने सभी समुद्री जीवों के बीच प्रेम और न्याय स्थापित किया। वह न केवल समुद्र का राजा था, बल्कि उसकी आत्मा भी।
बहुत समय पहले की बात है, सातों समंदरों के पार एक रहस्यमयी द्वीप था—जिसे कोई नहीं ढूंढ पाता था। उस द्वीप के गर्भ में छिपा था एक अद्भुत सिंहासन, जिस पर विराजमान होने वाला ही समुद्र का सम्राट कहलाता था। emperor of the sea in hindi
वहाँ एक मछुआरा था, सागर। वह गरीब था, लेकिन उसकी आत्मा में समुद्र के प्रति अगाध प्रेम था। एक दिन भीषण तूफान में उसकी नाव टूट गई, और वह बेहोश होकर उसी रहस्यमयी द्वीप के किनारे जा पहुंचा। लहरें ऊंची उठतीं
और आज भी, जब चाँदनी रातों में समंदर शांत होता है, तो बूढ़े मछुआरे कहते हैं—"देखो, समुद्र का सम्राट अपनी प्रजा से मिल रहा है।" सागर। वह गरीब था
समुद्र के राजा की कहानी
जागने पर उसने देखा कि उसके सामने एक विशाल सीप थी, जो नीले प्रकाश से चमक रही थी। सीप के अंदर एक मोती नहीं, बल्कि समुद्री देवता का आशीर्वाद था। एक गंभीर आवाज़ गूंजी—"सागर, तू सच्चे दिल से समुद्र से प्रेम करता है। तू ही इस सिंहासन का असली हकदार है।"