Nilavanti Granth In Hindi — Book

 

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Nilavanti Granth In Hindi — Book

इस ग्रंथ का सबसे सरल उपयोग यह है कि व्यक्ति सुबह उठकर महीने की तिथि देखता है और उस तिथि के सामने लिखे परिणाम को पढ़ता है। उदाहरण के लिए, ‘भाद्रपद कृष्ण द्वादशी - नील’ हो तो समझ लिया जाता है कि आज यात्रा करना, धन लेन-देन करना या नया वस्त्र धारण करना वर्जित है। इसके विपरीत, ‘शुभ’ या ‘अमृत’ वाली तिथियों में विवाह, गृह प्रवेश, व्यापार आरंभ आदि मांगलिक कार्य संपन्न किए जाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में किसान बीज बोने से पहले भी निलावंती ग्रंथ देखते हैं, ताकि फसल अच्छी हो।

भारतीय लोक साहित्य और ज्योतिष की परंपरा में ‘निलावंती ग्रंथ’ एक विशेष स्थान रखता है। यह ग्रंथ मुख्यतः उत्तर भारत, विशेषकर राजस्थान, उत्तर प्रदेश और बिहार के ग्रामीण अंचलों में लोकप्रिय है। हालाँकि इसे आधुनिक विज्ञान की कसौटी पर नहीं परखा जा सकता, फिर भी यह ग्रंथ सदियों से लोगों की दिनचर्या, कृषि कार्यों और शुभ-अशुभ विचारों का आधार बना हुआ है। यह निबंध ‘निलावंती ग्रंथ’ की प्रकृति, इसके उपयोग, विश्वासों और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डालेगा। nilavanti granth in hindi book

निष्कर्षतः, ‘निलावंती ग्रंथ’ भारतीय लोक जीवन का एक रोचक और अभिन्न अंग है। यह ग्रंथ हमें यह बताता है कि कैसे हमारे पूर्वजों ने समय को समझने और उसे नियंत्रित करने का प्रयास किया। आज के युग में जहाँ हम वैज्ञानिक सोच को अपना रहे हैं, वहीं इस ग्रंथ को सांस्कृतिक धरोहर के रूप में देखना चाहिए, न कि कठोर अनुशासन के रूप में। यह हमारी लोक चेतना की वह पोथी है, जिसमें विज्ञान से अधिक विश्वास और तर्क से अधिक परंपरा की गंध आती है। इसके संदेशों को आँख मूंदकर मानने के बजाय, हमें इसके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक आयामों को समझना चाहिए। ‘निलावंती’ केवल शुभ-अशुभ की पुस्तक नहीं, बल्कि एक जीवंत लोक-ग्रंथ है, जो आज भी गाँव-देहात के लाखों लोगों के लिए प्रेरणा और सावधानी का स्रोत है। nilavanti granth in hindi book

‘निलावंती’ अनिवार्य रूप से एक ज्योतिषीय पंचांग या भविष्यवाणी की पुस्तक है, जिसे ‘नीलकंठी’ या ‘फलादेश पद्धति’ के नाम से भी जाना जाता है। इसे ऋषि मुनियों की परंपरा से जोड़कर देखा जाता है, हालाँकि इसके वास्तविक रचयिता अज्ञात हैं। यह ग्रंथ मानता है कि किसी विशेष दिन, तिथि, नक्षत्र और ग्रहों की स्थिति के आधार पर वर्ष के प्रत्येक दिन का एक विशिष्ट फल (परिणाम) होता है। निलावंती ग्रंथ में प्रत्येक तिथि को ‘नील’, ‘अमृत’, ‘विष’ या ‘शुभ’ जैसे शब्दों से चिह्नित किया गया है। उदाहरण के लिए, यदि कोई दिन ‘नील’ कहलाता है, तो उसे अशुभ मानकर कोई नया कार्य शुरू नहीं किया जाता। nilavanti granth in hindi book

निलावंती ग्रंथ केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि जन सामान्य के मानसिक संसार का प्रतिबिंब है। यह ग्रंथ उस समय के लोगों को मानसिक सहारा देता है, जब वे प्राकृतिक आपदाओं या जीवन की अनिश्चितताओं से जूझ रहे होते थे। यह सामूहिक अचेतन का एक हिस्सा है, जहाँ समय को रेखांकित करने का एक अनूठा तरीका देखने को मिलता है। महिलाएँ अक्सर इस ग्रंथ के आधार पर अपने घर के मांगलिक कार्यों की योजना बनाती हैं। कई जगहों पर तो निलावंती ग्रंथ को घर की देवालय में विधिवत रखा जाता है।